मंहगाई की मार

 महंगाई की मार

महंगाई की मार से जनता, आज बड़ी बेहाल,

रसोई का बजट बिगड़ा, मुश्किल हुआ हर हाल।

डीजल-पेट्रोल के दाम, सौ के पार निकलते,

आम आदमी के सपने, रोज़ महंगे पड़ते।

चीनी जो कभी 45 थी, अब 65 के पार हुई,

रसोई की हर चीज़ आज, महंगाई की शिकार हुई।

दाल, तेल और सब्जी ने बढ़ाई घर की चिंता,

कमाई वही पुरानी, खर्चों की बढ़ती गिनती।

पेट्रोल में E20 इथेनॉल मिलाने की बात,

जनता पूछे सरकार से—कब सुधरेंगे हालात?

गाड़ी चलाना मुश्किल, सफर हुआ लाचार,

हर घर पूछ रहा आज—कब घटेगा ये भार?

खाद के लिए किसान, दर-दर भटक रहा,

मेहनत करके भी वह, चिंता में सिमट रहा।

बीज महंगा, खाद महंगी, महंगा हर सामान,

कैसे खुशहाल बनेगा फिर, देश का किसान?

मैं विकास मौर्य कहता हूँ, सरकार से विनती है,

जनता के चेहरे पर अब खुशियों की जरूरत है।

महंगाई को कम कर दो, राहत दो परिवारों को,

सस्ता कर दो जीवन को, मेहनतकश इंसानों को।

न नौजवान परेशान हो, न किसान मजबूर,

न गरीब की थाली रहे, महंगाई से दूर।

जनता ने जो विश्वास दिया, उसका मान रखो,

महंगाई की इस आग को, अब थोड़ा शांत करो।

तेल सस्ता हो, खाद मिले, किसान मुस्काए,

मेहनतकश की मेहनत का पूरा फल घर आए।

रोटी, कपड़ा, घर और शिक्षा—सबका हो अधिकार,

तभी तो खुशहाल बनेगा अपना हिंदुस्तान अपार।

विकास मौर्य की यही पुकार—

कम हो महंगाई, खुशहाल हो परिवार।

किसान के खेत में खुशहाली आए,

हर घर में फिर मुस्कान नजर आए।

लेखक - विकास मौर्य

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