कांवड़ियों की पावन यात्रा
निकली है यात्रा कांवड़ियों की,
हर-हर भोले की गूंज लिए,
कोई अयोध्या से चला है साथी,
कोई हरिद्वार से गंगाजल लिए।
अपने-अपने गंतव्य की ओर,
भक्ति का दीप जलाते हैं,
कंधों पर कांवड़, मन में महादेव,
हर कदम शिव नाम सुनाते हैं।
अयोध्या से दर्शननगर होकर,
पूरा बाजार, मया की राह,
उनियार, महबूबगंज से होते,
टांडा तक बढ़ती भक्ति की चाह।
फिर महादेव की पावन धरती,
बम-बम भोले का जयकारा,
पृथ्वीपुर की ओर बढ़ते कदम,
शिवभक्ति ने सबको संवारा।
लंगड़तीर घाट पर जल लेकर,
जब कांवड़िया शिव को नहलाए,
मन की हर मुराद महादेव से,
श्रद्धा के संग पूरी हो जाए।
सत्रह अगस्त, नाग पंचमी का दिन,
शिवबाबा के दरबार सजेंगे,
अम्बेडकर नगर की पावन धरती पर,
भोलेनाथ को जल चढ़ेंगे।
न थके कदम, न रुके काफिला,
हर मुख पर बस भोले का नाम,
सुखद हो सबकी कांवड़ यात्रा,
महादेव रखें सबका मान।
पृथ्वीपुर से लेखक — डॉ. विकास मौर्य
हर-हर महादेव की गूंज रहे,
हर मन में शिव का वास रहे,
कांवड़ियों की यात्रा मंगलमय हो,
भोलेनाथ का सब पर आशीर्वाद रहे।
हर हर महादेव! 🚩🔱
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