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Showing posts from August, 2026

मंहगाई की मार

 महंगाई की मार महंगाई की मार से जनता, आज बड़ी बेहाल, रसोई का बजट बिगड़ा, मुश्किल हुआ हर हाल। डीजल-पेट्रोल के दाम, सौ के पार निकलते, आम आदमी के सपने, रोज़ महंगे पड़ते। चीनी जो कभी 45 थी, अब 65 के पार हुई, रसोई की हर चीज़ आज, महंगाई की शिकार हुई। दाल, तेल और सब्जी ने बढ़ाई घर की चिंता, कमाई वही पुरानी, खर्चों की बढ़ती गिनती। पेट्रोल में E20 इथेनॉल मिलाने की बात, जनता पूछे सरकार से—कब सुधरेंगे हालात? गाड़ी चलाना मुश्किल, सफर हुआ लाचार, हर घर पूछ रहा आज—कब घटेगा ये भार? खाद के लिए किसान, दर-दर भटक रहा, मेहनत करके भी वह, चिंता में सिमट रहा। बीज महंगा, खाद महंगी, महंगा हर सामान, कैसे खुशहाल बनेगा फिर, देश का किसान? मैं विकास मौर्य कहता हूँ, सरकार से विनती है, जनता के चेहरे पर अब खुशियों की जरूरत है। महंगाई को कम कर दो, राहत दो परिवारों को, सस्ता कर दो जीवन को, मेहनतकश इंसानों को। न नौजवान परेशान हो, न किसान मजबूर, न गरीब की थाली रहे, महंगाई से दूर। जनता ने जो विश्वास दिया, उसका मान रखो, महंगाई की इस आग को, अब थोड़ा शांत करो। तेल सस्ता हो, खाद मिले, किसान मुस्काए, मेहनतकश की मेहनत का पूरा...

कांवड़ियों की पावन यात्रा

  निकली है यात्रा कांवड़ियों की, हर-हर भोले की गूंज लिए, कोई अयोध्या से चला है साथी, कोई हरिद्वार से गंगाजल लिए। अपने-अपने गंतव्य की ओर, भक्ति का दीप जलाते हैं, कंधों पर कांवड़, मन में महादेव, हर कदम शिव नाम सुनाते हैं। अयोध्या से दर्शननगर होकर, पूरा बाजार, मया की राह, उनियार, महबूबगंज से होते, टांडा तक बढ़ती भक्ति की चाह। फिर महादेव की पावन धरती, बम-बम भोले का जयकारा, पृथ्वीपुर की ओर बढ़ते कदम, शिवभक्ति ने सबको संवारा। लंगड़तीर घाट पर जल लेकर, जब कांवड़िया शिव को नहलाए, मन की हर मुराद महादेव से, श्रद्धा के संग पूरी हो जाए। सत्रह अगस्त, नाग पंचमी का दिन, शिवबाबा के दरबार सजेंगे, अम्बेडकर नगर की पावन धरती पर, भोलेनाथ को जल चढ़ेंगे। न थके कदम, न रुके काफिला, हर मुख पर बस भोले का नाम, सुखद हो सबकी कांवड़ यात्रा, महादेव रखें सबका मान। पृथ्वीपुर से लेखक — डॉ. विकास मौर्य हर-हर महादेव की गूंज रहे, हर मन में शिव का वास रहे, कांवड़ियों की यात्रा मंगलमय हो, भोलेनाथ का सब पर आशीर्वाद रहे। हर हर महादेव! 🚩🔱