मेरी पहली यात्रा उत्तराखंड की ( यात्रा वृतांत)

 श्री गणेशाय नमः।                                                मेरी पहली यात्रा उत्तराखंड की ( यात्रा वृतांत)

मेरा नाम विकास मौर्य है, 

मैं ग्राम व पोस्ट - पृथ्वीपुर, ब्लॉक - बसखारी , तहसील- टाण्डा, जिला - अम्बेडकर नगर , राज्य - उत्तर प्रदेश , देश -भारत पिन कोड- २२४१९० का रहने वाला हूँ | 

आप सभी के समक्ष अपनी वास्तविक यात्रा वृतांत पेश कर रहा हूं।

मेरे भैया के एक प्रिय दोस्त हैं जिनका नाम उमेन्द्र  सिंह है | वो मेरे पास आये उस समय भैया कुछ दिनों के लिए कहीं गए थे|  भैया के दोस्त आए और मुझसे कहा विकास बाबा नीब करौरी  के धाम दर्शन करने को चलोगे , मेरे सौभाग्य में शायद था, बाबा नीब करौरी के दर्शन के हमने उमेंद्र भैया से कहा चलेंगे | मेरी भी बहुत इच्छा थी कि बाबा के दर्शन के लिए, फिर  उमेंद्र भैया ने कहा टिकट ऑनलाइन सीट बुकिंग कर ले, पहले उमेंद्र भैया ने खुद साइबर कैफे जाकर टिकट बुक कराने का सोचा लेकिन टिकट बुक नहीं हो पाए । फिर मेरे पास आए बोले विकास टिकट बुक नहीं हुआ , फिर मैंने कहा उमेन्द्र भैया लाइए मैं अपने मोबाइल से बुक करता हूं । फिर मैंने अपने पेटीएम से बुक किया शायद दिन शनिवार था, फिर हम सब ने अपने — अपने कपड़े पैक किया जो की ट्रेन की टाइम 11:15 PM की थी । लखनऊ से हल्द्वानी तक का डेढ़ सौ में एक लोगों की दो सीटिंग वाली में बुक हो गई इसके बाद सायं को हम दोनों लोग रास्ते में कुछ खाने के लिए कुछ रोटी और सब्जी बना लिया । इसके बाद शाम के वक्त जब निकलने को हुआ तो  खूब तेजी से बारिश होने लगी थी। हम दोनों एक ऑटो में बैठकर बैटरी वाले रिक्शा पर मड़ियांव ब्रिज के नीचे आए और बैटरी वाले ऑटो को पांच के हिसाब से 2 लोगों का ₹10 दे दिया| फिर मड़ियांव पुल से ऑटो में बैठकर चारबाग स्टेशन के लिए निकल दिए ,चारबाग स्टेशन पर पहुंचकर  देखा गया कि वहां भी बारिश हो रही थी ,तेजी से जब समय देखा गया तब जाकर स्टेशन की ओर रवाना हुए और अपना बैग सही स्थान पर ट्रेन के अंदर रख दिया गया लखनऊ से काठगोदाम वाली ट्रेन में बैठ गए लखनऊ से काठगोदाम के लिए ट्रेन 11:15pm पर चलती हम सभी आपस में बातें कर रहे थे उमेंद्र भैया अपने घर से कुछ खाने वाली चीजें बनवा कर लाए थे| मैं भी अपने घर से कुछ बनवा कर ले गया था| हम दोनों लोग थोड़ा बहुत खा पीकर सो गए ट्रेन में बहुत से लोग अपनी सीट पर बैठकर मोबाइल देख रहे थे कोई आपस में बैठकर हंसी मजाक कर रहे थे एकदम सुबह लगभग 8:00 AM पर हल्द्वानी पहुंचा दी लखनऊ से काठगोदाम ट्रेन से हल्द्वानी पर उतरे हम और हमारे उमेंद्र सिंह भैया, मैं अपनी पूरी जिंदगी में कभी पहाड़ नहीं देखा था | हल्द्वानी में जब मैं ट्रेन से उतरा तो पहाड़ देखकर बहुत खुश था|  हल्द्वानी स्टेशन पर हम और उमेंद्र भैया दोनों लोग  बाथरूम करके स्नान कर लिया , हम दोनों लोग बारी — बारी से स्नान करके अपने कपड़े पहने और फिर हल्द्वानी बस अड्डे की तरफ चल दिए,। फिर भी मैं बहुत खुश  उत्सुक था । क्योंकि अपने लाइफ में वास्तविक पहाड़ देखा कभी नहीं था। फिर हम दोनों लोग बस में बैठ गए जो बस हल्द्वानी से नीब करौरी बाबा की ओर जाती हम सब पहाड़ों का आनंद लेते हुए चल दिए रास्ते में ऐसे खतरनाक मोड़ , ऐसी ढलान ऐसी खाई देखी कि मेरी डर की वजह से कलेजा हाथ में आ गया अर्थात् सुक्की पुट्टी गुम हो गई इस तरह यात्रा करते करते, नीब करौरी बाबा के दर्शन के स्थान पर पहुंच गए ।जब हम दोनों नीब करौरी बाबा  के दर्शन के लिए बस से उतरे तो वहां की छटा निराली थी पहाड़ बादलों  से छिपे हुए थे ।और वहां पर पहुंचने पर उमेंद्र भैया के एक अच्छे दोस्त से मुलाकात हुई। अब हम दोनों लोग उनके कमरे पर गए वहां पर अपना बैग रखकर नीब करौरी बाबा के दर्शन के लिए निकल दिए नीब करौरी बाबा के दर्शन करके मुझे बहुत अच्छा लगा । सबसे अच्छा वहां की प्राकृतिक छटा मुझे अच्छा लगा जो पहाड़ अधिक ऊंचे ऊंचे थे। जोकि आपस में अठखेलियां खेल रही थी । उमेंद्र भैया के एक दोस्त मुंबई के रहने वाले थे 

। जिनका नाम रमेश तिवारी था उन्होंने कहा मेरे नाम से 10000 का चढ़ावा चढ़ा देना उन्होंने 10,000 मेरे खाता में भेजा फिर मैंने निकालकर दे दिया और 10,000 का चढ़ावा रमेश मिश्रा जी के नाम से चढ़ा दिया गया हम सभी वहां पर 10:00 बजे से शाम के 4:00 बजे तक रुके इस बीच में हम सब आपस में एक दूसरे से बातचीत की और फिर वहां की छटा का आनंद लिया। जो अपने आप में मनोरम मरणीय थी। हम लोगों की ट्रेन वापसी की रात 10:00 PM की थी इसलिए हम लोग 3:00 PM  पर निकल दिए बस की खिड़की से पहाड़ों की प्राकृतिक छटा का आनंद लेते हुए और फिर हम लोग हल्द्वानी बस अड्डे पर आ गए ।हल्द्वानी पर हम लोग एक रेस्टोरेंट में भोजन किया। और वहां का कुछ शुद्ध भोजन खाकर आनंद हो गए । फिर ट्रेन पकड़ कर वापस घर आ गए ।इसी क्रम में एक बार हम लोग दोबारा नीब करौरी बाबा के दर्शन के लिए गए लेकिन दूसरी बार उत्तराखंड में नैनीताल के भी दर्शन किए नैनीताल वहां की बड़ी सी झील के दर्शन किए नैनी माता के भी दर्शन किए ।वहां की भी नैनीताल की भी प्राकृतिक मनोरम छटा देखने लायक है। हम लोगों को सायं की ट्रेन थी काठगोदाम से लखनऊ की ट्रेन पकड़ कर घर आ गए हमारी यह उत्तराखंड की वास्तविक यात्रा का वृतांत है आप लोगों को हमारी वास्तविक यात्रा वृतांत कैसी लगी अपने शब्दों में जरूर बताना जय हिंद जय भारत वंदे मातरम भारत माता की जय|😌✍️📝📙🇮🇳🖋️😂💝😻💖🙏👍🇮🇳🇮🇳🇮🇳🎉🎉 लेखक - Drx विकास मौर्य 👍🇮🇳🎉🙏😻💖

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